बलखाती हवा,
जब छू बादल को,
सावन के राग सुनाती है।
दिल का गागर,
आँख से छलके,
तेरी याद बहुत आती है॥
धूल भरी आँधी भी ठहरी,
ठहर गये,
लू के झोके।
तीज भी आई झूला लेकर,
मेले आये,
ले मिलन के मौके॥
पागल एक पपीहे की धुन,
जब,
कुछ कानोँ मेँ कह जाती है।
दिल का गागर,
आँख से छलके,
तेरी याद बहुत आती है॥
॰॰ प्यारेलाल भाम्बू ॰॰
जब छू बादल को,
सावन के राग सुनाती है।
दिल का गागर,
आँख से छलके,
तेरी याद बहुत आती है॥
धूल भरी आँधी भी ठहरी,
ठहर गये,
लू के झोके।
तीज भी आई झूला लेकर,
मेले आये,
ले मिलन के मौके॥
पागल एक पपीहे की धुन,
जब,
कुछ कानोँ मेँ कह जाती है।
दिल का गागर,
आँख से छलके,
तेरी याद बहुत आती है॥
॰॰ प्यारेलाल भाम्बू ॰॰

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