भूले बिसरे गीत पुराने, काहे याद दिलाओ।
ढल आई है रात यह आधी,
अब तो कवि सो जाओ॥
'गीत-गजल' के इन गीतोँ मेँ कितना दर्द समाया।
जानेवाला जग से पागल, लौटकर फिर कब आया॥
एक छाया का बुत बनाकर ना जीवन जहर बनाओ।
ढल आई है रात यह आधी अब तो कवि सो जाओ॥
कल के लमहेँ कल बीते , इक कल फिर भी आयेगा।
काली रात की कोख मेँ पागल फिर सूरज लहरायेगा॥
सुर की दुनिया सहज सजेगी, फिर से साज उठाओ॥
भूले बिसरे गीत पुराने, ना फिर से याद दिलाओ॥
...... Pyarelal Bhamboo.......
ढल आई है रात यह आधी,
अब तो कवि सो जाओ॥
'गीत-गजल' के इन गीतोँ मेँ कितना दर्द समाया।
जानेवाला जग से पागल, लौटकर फिर कब आया॥
एक छाया का बुत बनाकर ना जीवन जहर बनाओ।
ढल आई है रात यह आधी अब तो कवि सो जाओ॥
कल के लमहेँ कल बीते , इक कल फिर भी आयेगा।
काली रात की कोख मेँ पागल फिर सूरज लहरायेगा॥
सुर की दुनिया सहज सजेगी, फिर से साज उठाओ॥
भूले बिसरे गीत पुराने, ना फिर से याद दिलाओ॥
...... Pyarelal Bhamboo.......
