Thursday, September 27, 2018

फिर से कोई गीत लिखें...

फिर से कोई गीत लिखेँ हम,
मितवा, तेरी याद मेँ।
पिघल जायेँ,
तेरी जुदाई के गम,
सहमेँ सुर बन,
दर्दभरी मेरी आवाज मेँ॥

उसूलोँ पर जिसने,
जाँ तक लूटादी।
जालिम जमाने ने,
वह हस्ती मिटादी॥

बेबस बहते आँसु से बेखबर,
पागल यह दिल।
रफ्ता रफ्ता छूने चला,
खोयी मोह्ब्बत की मंजिल॥

उदास लफ्जोँ की लय बना,
सजदा करता है तुम्हे,
अये वफा की मूरत,
फख्र ए शहीदी अन्दाज मेँ।
फिर से कोई गीत लिखेँ हम,
मितवा, तेरी याद मेँ॥

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