यह कौन है,
जिसकी इबादत मेँ,
दीवाने चाँद ने सिर झुकाया है।
पतझर मेँ सहमी शाखोँ सेँ,
हारी हुयी उम्मीदोँ सा,
झाँकता,
धुँधलायी चाँदनी मे लिपटा,
यह किसका साया है॥
मुद्दतेँ होगयी,
खुद को भुलाये,
उस बीते हुये जमाने मेँ।
जाने कब बन गया,
मैँ एक किरदार,
नाकाम मोहब्बत के फसाने मेँ॥
तू ही बता,
कैसे भूलूँ तेरी यादोँ को,
उन बीते लमहोँ ने,
ख्वाबोँ मेँ भी,
मुझको रुलाया है।
गम न होता बेवफाई का,
यारा,
मुझको तो,
तेरी वफा ने सताया है॥
॰ प्यारेलाल भाम्बू ॰
जिसकी इबादत मेँ,
दीवाने चाँद ने सिर झुकाया है।
पतझर मेँ सहमी शाखोँ सेँ,
हारी हुयी उम्मीदोँ सा,
झाँकता,
धुँधलायी चाँदनी मे लिपटा,
यह किसका साया है॥
मुद्दतेँ होगयी,
खुद को भुलाये,
उस बीते हुये जमाने मेँ।
जाने कब बन गया,
मैँ एक किरदार,
नाकाम मोहब्बत के फसाने मेँ॥
तू ही बता,
कैसे भूलूँ तेरी यादोँ को,
उन बीते लमहोँ ने,
ख्वाबोँ मेँ भी,
मुझको रुलाया है।
गम न होता बेवफाई का,
यारा,
मुझको तो,
तेरी वफा ने सताया है॥
॰ प्यारेलाल भाम्बू ॰

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