आई है फिर से याद तेरी,
जब साँझ ने रंग बिखराया है।
इस कैर की उलझी शाखोँ सा,
एक सपना फिर लहराया है॥
दूर कहीँ एक आहट सी,
हलका सा अहसास जगाती है।
टूहू टूहू करती एक टिटहरी,
उन लमहोँ की याद दिलाती है॥
देखो फिजाओँ मेँ सहमा,
एक टूटे दिल का साया है।
आयी है फिर से याद तेरी,
जब साँझ ने रंग बिखराया है॥
यह पागल अब भी गाता है,
उन प्रीत के रूठे तरानोँ को।
इन नम आँखोँ का गीलापन,
देता है दर्द दीवानोँ को॥
साँझ के तीतरपंखी बादलोँ मेँ,
मेरी घुटन का दर्द समाया है।
आयी है फिर से याद तेरी,
जब साँझ ने रंग बिखराया है॥
॰ प्यारेलाल भाम्बू ॰
जब साँझ ने रंग बिखराया है।
इस कैर की उलझी शाखोँ सा,
एक सपना फिर लहराया है॥
दूर कहीँ एक आहट सी,
हलका सा अहसास जगाती है।
टूहू टूहू करती एक टिटहरी,
उन लमहोँ की याद दिलाती है॥
देखो फिजाओँ मेँ सहमा,
एक टूटे दिल का साया है।
आयी है फिर से याद तेरी,
जब साँझ ने रंग बिखराया है॥
यह पागल अब भी गाता है,
उन प्रीत के रूठे तरानोँ को।
इन नम आँखोँ का गीलापन,
देता है दर्द दीवानोँ को॥
साँझ के तीतरपंखी बादलोँ मेँ,
मेरी घुटन का दर्द समाया है।
आयी है फिर से याद तेरी,
जब साँझ ने रंग बिखराया है॥
॰ प्यारेलाल भाम्बू ॰

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