उनसे कहना,
फिर फूलोँ ने रंग बिखराया है।
आँसू बन भीगी पलकोँ मेँ,
एक जख्म हरा हो आया है॥
दिल मेँ दफना,
तेरी यादोँ के गम।
एक मुद्दत से,
चुप बैठे थे हम॥
आज कोयल ने कुहुक लगा,
सोये सपनोँ को,
फिर से जगाया है।
उनसे कहना,
फिर फूलोँ ने रंग बिखराया है॥
मोरोँ ने मिल मेघोँ के संग।
पुरवा पवन मेँ,
भरे विरहा के रंग॥
ओ जानम,
तेरे जाने के बाद,
फिर से मौसम ने बदले अंदाज।
कई सालोँ बाद,
एक पागल भँवरेँ ने आज,
धीमे से कुछ गुनगुनाया है।
उनसे कहना,
फिर फूलोँ ने बिखराया है॥
॰ प्यारेलाल भाम्बू ॰
फिर फूलोँ ने रंग बिखराया है।
आँसू बन भीगी पलकोँ मेँ,
एक जख्म हरा हो आया है॥
दिल मेँ दफना,
तेरी यादोँ के गम।
एक मुद्दत से,
चुप बैठे थे हम॥
आज कोयल ने कुहुक लगा,
सोये सपनोँ को,
फिर से जगाया है।
उनसे कहना,
फिर फूलोँ ने रंग बिखराया है॥
मोरोँ ने मिल मेघोँ के संग।
पुरवा पवन मेँ,
भरे विरहा के रंग॥
ओ जानम,
तेरे जाने के बाद,
फिर से मौसम ने बदले अंदाज।
कई सालोँ बाद,
एक पागल भँवरेँ ने आज,
धीमे से कुछ गुनगुनाया है।
उनसे कहना,
फिर फूलोँ ने बिखराया है॥
॰ प्यारेलाल भाम्बू ॰

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