॰ एक गीत तेरी याद मेँ .....
तेरी यादोँ के दर्द मेँ दिलवर,
हर बुत को आज रुलादूँगा।
आँसुओँ के सैलाब मेँ मितवा,
मैँ जग को आज बहादूँगा॥
सँध्या तारा बनकर,
जब तुम अपनी झलक दिखाओगी।
मेरे जलते लहू की लाली मेँ,
सूरज को भीगा पाओगी॥
रोयेँगे तारे संग मेरे,
मैँ चँदा की नींद उड़ादूँगा।
तेरी यादोँ के दर्द मेँ दिलवर,
हर बुत को आज रुलादूँगा॥
वह चंचल नैनोँ की चितवन,
फिर होठोँ पर गहराई है।
एक आवारा लट फिर से,
तेरे माथे पर लहराई है॥
आ, लौटकर आ, मेरे गीतोँ मेँ,
तेरी रुह को अमर बनादूँगा।
तेरी यादोँ के दर्द मेँ दिलवर, हर बुत को आज रुलादूँगा॥
तेरी यादोँ के दर्द मेँ दिलवर,
हर बुत को आज रुलादूँगा।
आँसुओँ के सैलाब मेँ मितवा,
मैँ जग को आज बहादूँगा॥
सँध्या तारा बनकर,
जब तुम अपनी झलक दिखाओगी।
मेरे जलते लहू की लाली मेँ,
सूरज को भीगा पाओगी॥
रोयेँगे तारे संग मेरे,
मैँ चँदा की नींद उड़ादूँगा।
तेरी यादोँ के दर्द मेँ दिलवर,
हर बुत को आज रुलादूँगा॥
वह चंचल नैनोँ की चितवन,
फिर होठोँ पर गहराई है।
एक आवारा लट फिर से,
तेरे माथे पर लहराई है॥
आ, लौटकर आ, मेरे गीतोँ मेँ,
तेरी रुह को अमर बनादूँगा।
तेरी यादोँ के दर्द मेँ दिलवर, हर बुत को आज रुलादूँगा॥

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