Friday, December 13, 2024

रोहिड़ा के फूलों ने फिर बैसाख की याद दिलाई है

रोहिड़ा के फूलों ने,

फिर बैसाख की याद दिलाई है,

लू के झोंकों में,

पसीने से तर बतर , 

उस बकरी के मेमने को प्यार से सहलाते हुए,

तुम्ही ने तो कहा था, 

गर्म बालू के टीलों में, 

 मकरंद का मिठास लिए,

इन केसरिया कुसुमल फूलों के तरह,

मेरे प्यार की मिठास सदा तुम्हारे साथ रहेगी।

अब भी हर बैसाख में तपते हैं ये टीले,

हर साल, 

रोहिड़ा के फूलों का कुसुमल रंग,

इन टीलों में,

जीवन की आस्था का रंग भरने, 

मीठे मकरंद के साथ, 

लहलहाता है। 

बकरी का बच्चा,

इसी रोहिड़ा के पास, 

फिर प्यार से पूंछ हिला रहा है,

हां,

सिर्फ तुम नहीं हो,

बड़ी निर्ममता से,

यह मंजर,

मुझे तुम्हारे प्यार की मिठास की याद दिलाता है।

Friday, October 12, 2018

भूले बिसरे गीत पुराने...

भूले बिसरे गीत पुराने, काहे याद दिलाओ।
 ढल आई है रात यह आधी,
अब तो कवि सो जाओ॥
  'गीत-गजल' के इन गीतोँ मेँ कितना दर्द समाया।
 जानेवाला जग से पागल, लौटकर फिर कब आया॥
 एक छाया का बुत बनाकर ना जीवन जहर बनाओ।
 ढल आई है रात यह आधी अब तो कवि सो जाओ॥
 कल के लमहेँ कल बीते , इक कल फिर भी आयेगा।
 काली रात की कोख मेँ पागल फिर सूरज लहरायेगा॥
 सुर की दुनिया सहज सजेगी, फिर से साज उठाओ॥
   भूले बिसरे गीत पुराने, ना फिर से याद दिलाओ॥
...... Pyarelal Bhamboo.......

Thursday, September 27, 2018

चांद को किसने रोते देखा...

चाँद को किसने रोते देखा,
बेबस सी तनहाई मेँ।
एक दीवाना शायर बन बैठा,
ओ मितवा तेरी जुदाई मेँ॥
पिघल गये गम के बादल,
मैँ बाँट रहा आँसु खारे।
दर्द दिये जो दिल को तुने,
वे नज्म बने हैँ सारे॥
यादेँ हैँ या नजराने हैँ,
या आँसुओँ के गमगीन तराने हैँ।
दिल मेँ छलके दर्द पुराने,
यह गीत तो सिर्फ बहाने हैँ॥

पपीहा रे ओ रे पपीहा...

पपीहा रे,
ओ रे पपीहा!
तु पीव पीव काहे बोले।
यह अनबुझ प्यास बुझे ना पागल,
क्योँ विरहा के रंग घोले॥
युग बदले,
पर, रीत न बदली।
पागल दिल की प्रीत न बदली॥
क्योँ रो रो जी हलकान करे तु।
मिलन की काहे तान भरे तु॥
पंछी, जो दिल प्रीत की डगर चले,
वे जल कर हुये फफोले।
यह अनबुझ प्यास बुझे ना पागल,
क्योँ विरहा के रंग घोले॥

शायद तुझको याद नहीँ,
सोहिनी और महीवाल सखे।
यहाँ जिन्दा जलाया मजनूँ को,
राँझा हुआ बदहाल सखे॥
काहे पागल, तु चिल्लाये।
जीवन भर का रोग लगाये॥
इस ठंडी आग मेँ जल जल मर गये,
दीवानोँ के टोले।
पपीहा रे,
ओ रे पपीहा!
तू पीव, पीव, काहे बोले॥

सोने दे मुझको पागल तु,
मैँ भी हूँ दीवाना।
जग से रुठा,
खुद से टूटा,
एक घायल परवाना॥
अब भी आश लगाये बैठा,
विश्वास ने उनसे डोले।
यह अनबुझ प्यास बुझे ना पागल,
क्योँ विरहा के रंग घोले॥

पपीहा रे,
ओ रे पपीहा!
तु पीव, पीव, काहे बोले॥
॰ प्यारेलाल भाम्बू ॰

फिर से कोई गीत लिखें...

फिर से कोई गीत लिखेँ हम,
मितवा, तेरी याद मेँ।
पिघल जायेँ,
तेरी जुदाई के गम,
सहमेँ सुर बन,
दर्दभरी मेरी आवाज मेँ॥

उसूलोँ पर जिसने,
जाँ तक लूटादी।
जालिम जमाने ने,
वह हस्ती मिटादी॥

बेबस बहते आँसु से बेखबर,
पागल यह दिल।
रफ्ता रफ्ता छूने चला,
खोयी मोह्ब्बत की मंजिल॥

उदास लफ्जोँ की लय बना,
सजदा करता है तुम्हे,
अये वफा की मूरत,
फख्र ए शहीदी अन्दाज मेँ।
फिर से कोई गीत लिखेँ हम,
मितवा, तेरी याद मेँ॥

मैं रोने वाला शायर हूं...

मैँ रोनेवाला शायर हूँ,
रोता और रुलाता हूँ।
दिल के दर्द को ओ मितवा,
मैँ हँसकर गीत बनाता हूँ॥

तुलिका हाथोँ मेँ लेकर,
पागल बना चितेरा रे।
धुँधली यादोँ की रेखा ने,
कैसा जाल उकेरा रे॥
उन रूपहली यादोँ मेँ घिर,
तस्वीर बनाये जाता हूँ।
दिल के दर्द को ओ मितवा,
मैँ हँसकर गीत बनाता हूँ॥

सहज सिमटकर याद तेरी,
जब आँखोँ मेँ लहराती हैँ।
पीर पपीहे की रातोँ मेँ,
जब घाव हरा कर जाती है॥
निर्झर बहते आँसुओँ को,
मैँ लय की लोरी सुनाता हूँ।
दिल के दर्द को ओ मितवा,
मैँ हँसकर गीत बनाता हूँ॥

शायर कहते हैँ किसको,
यह तो मैँने ना जाना।
जख्मी दिल मेँ दर्द जो जागे,
मैने उनको पहचाना॥
दिल का गागर आँख से छलके,
मैँ फिर भी गाये जाता हूँ।
दिल के दर्द को ओ मितवा,
मैँ हँसकर गीत बनाता हूँ॥

उस टीले के पार कभी,
तुम ढोला-मारु गाती थी।
ढोला सा निर्मोही कहकर,
मुझको रोज चिढाती थी॥
गाकर ये दर्दीले गीत,
अपनी मारु को,
मैँ बीती याद दिलाता हूँ।
मैँ रोनेवाला शायर हूँ,
रोता और रुलाता हूँ॥
॰ - प्यारेलाल भाम्बू -॰

तेरी यादों का दर्द दिल में...

तेरी यादोँ का दर्द दिल मेँ,
कितने अदब से,
 अब तक छूपाया है।
ना जाने कैसी बेबसी है,
हो बेअदब पलकोँ ने,
आज एक आँसू ढलकाया है॥

 एक पागल ने कितने गीत लिखे,
तेरी रुसवाई पर।
अब तो हँसता है जहाँ सारा,
तेरे दीवाने की दीवानगी और बेहयाई पर॥
जब भी बरसी हैँ,
 घटा सावन की,
तेरी जुल्फोँ की मदहोशी मेँ,
तू क्या जाने,
कितने सपनोँ को,
हमने लूटाया है।
 तेरी यादोँ का दर्द दिल मेँ,
कितने अदब से,
अब तक छूपाया है॥