मैँ रोनेवाला शायर हूँ,
रोता और रुलाता हूँ।
दिल के दर्द को ओ मितवा,
मैँ हँसकर गीत बनाता हूँ॥
तुलिका हाथोँ मेँ लेकर,
पागल बना चितेरा रे।
धुँधली यादोँ की रेखा ने,
कैसा जाल उकेरा रे॥
उन रूपहली यादोँ मेँ घिर,
तस्वीर बनाये जाता हूँ।
दिल के दर्द को ओ मितवा,
मैँ हँसकर गीत बनाता हूँ॥
सहज सिमटकर याद तेरी,
जब आँखोँ मेँ लहराती हैँ।
पीर पपीहे की रातोँ मेँ,
जब घाव हरा कर जाती है॥
निर्झर बहते आँसुओँ को,
मैँ लय की लोरी सुनाता हूँ।
दिल के दर्द को ओ मितवा,
मैँ हँसकर गीत बनाता हूँ॥
शायर कहते हैँ किसको,
यह तो मैँने ना जाना।
जख्मी दिल मेँ दर्द जो जागे,
मैने उनको पहचाना॥
दिल का गागर आँख से छलके,
मैँ फिर भी गाये जाता हूँ।
दिल के दर्द को ओ मितवा,
मैँ हँसकर गीत बनाता हूँ॥
उस टीले के पार कभी,
तुम ढोला-मारु गाती थी।
ढोला सा निर्मोही कहकर,
मुझको रोज चिढाती थी॥
गाकर ये दर्दीले गीत,
अपनी मारु को,
मैँ बीती याद दिलाता हूँ।
मैँ रोनेवाला शायर हूँ,
रोता और रुलाता हूँ॥
॰ - प्यारेलाल भाम्बू -॰
रोता और रुलाता हूँ।
दिल के दर्द को ओ मितवा,
मैँ हँसकर गीत बनाता हूँ॥
तुलिका हाथोँ मेँ लेकर,
पागल बना चितेरा रे।
धुँधली यादोँ की रेखा ने,
कैसा जाल उकेरा रे॥
उन रूपहली यादोँ मेँ घिर,
तस्वीर बनाये जाता हूँ।
दिल के दर्द को ओ मितवा,
मैँ हँसकर गीत बनाता हूँ॥
सहज सिमटकर याद तेरी,
जब आँखोँ मेँ लहराती हैँ।
पीर पपीहे की रातोँ मेँ,
जब घाव हरा कर जाती है॥
निर्झर बहते आँसुओँ को,
मैँ लय की लोरी सुनाता हूँ।
दिल के दर्द को ओ मितवा,
मैँ हँसकर गीत बनाता हूँ॥
शायर कहते हैँ किसको,
यह तो मैँने ना जाना।
जख्मी दिल मेँ दर्द जो जागे,
मैने उनको पहचाना॥
दिल का गागर आँख से छलके,
मैँ फिर भी गाये जाता हूँ।
दिल के दर्द को ओ मितवा,
मैँ हँसकर गीत बनाता हूँ॥
उस टीले के पार कभी,
तुम ढोला-मारु गाती थी।
ढोला सा निर्मोही कहकर,
मुझको रोज चिढाती थी॥
गाकर ये दर्दीले गीत,
अपनी मारु को,
मैँ बीती याद दिलाता हूँ।
मैँ रोनेवाला शायर हूँ,
रोता और रुलाता हूँ॥
॰ - प्यारेलाल भाम्बू -॰

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