तेरी यादोँ का दर्द दिल मेँ,
कितने अदब से,
अब तक छूपाया है।
ना जाने कैसी बेबसी है,
हो बेअदब पलकोँ ने,
आज एक आँसू ढलकाया है॥
एक पागल ने कितने गीत लिखे,
तेरी रुसवाई पर।
अब तो हँसता है जहाँ सारा,
तेरे दीवाने की दीवानगी और बेहयाई पर॥
जब भी बरसी हैँ,
घटा सावन की,
तेरी जुल्फोँ की मदहोशी मेँ,
तू क्या जाने,
कितने सपनोँ को,
हमने लूटाया है।
तेरी यादोँ का दर्द दिल मेँ,
कितने अदब से,
अब तक छूपाया है॥
कितने अदब से,
अब तक छूपाया है।
ना जाने कैसी बेबसी है,
हो बेअदब पलकोँ ने,
आज एक आँसू ढलकाया है॥
एक पागल ने कितने गीत लिखे,
तेरी रुसवाई पर।
अब तो हँसता है जहाँ सारा,
तेरे दीवाने की दीवानगी और बेहयाई पर॥
जब भी बरसी हैँ,
घटा सावन की,
तेरी जुल्फोँ की मदहोशी मेँ,
तू क्या जाने,
कितने सपनोँ को,
हमने लूटाया है।
तेरी यादोँ का दर्द दिल मेँ,
कितने अदब से,
अब तक छूपाया है॥

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