Thursday, September 27, 2018

पलक में उलझा एक आंसू....

पलक मेँ उलझा एक आँसू,
फिर से आँख भर आई।
तेरी यादोँ के दर्द जगाने,
फिर काली घटा घिर आई॥

यह दिल पागल है,
 हाँ, माने ना,
कि लौटकर फिर तुम आओगी।
बैठ सिला पर अमराई मेँ,
फिर कोई गीत सुनाओगी॥
फिर गेँदा के फूल खिले हैँ,
 गुड़हल फिर से लहराई।
तेरी यादोँ के दर्द जगाने,
फिर काली घटा घिर आई॥

दर्दभरी उन यादोँ के साये,
मुझे उस टीले पर लेजाते हैँ।
रूपहले वे पागल पल,
मेरे गीतोँ मेँ ढलजाते हैँ॥
सहमी आहेँ सुर बन बैठी,
जब पुरवा ने ली अंगड़ाई।
पलक मेँ उलझा एक आँसू,
फिर से आँख भर आई॥

  ॰ प्यारेलाल भाम्बू ॰

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